Saturday, November 14, 2009

TAJ MAHAL - MUST BE INVESTIGATED BY UNESCO

agrasen

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[sanghshakha] Re: Fw: {RSS} Fwd: Tajmahal ya Tejo-Mahalaya

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bob mahta Thu, Nov 12, 2009 at 3:46 AM
Reply-To: sanghshakha@yahoogroups.com
To: anirban bandyopadhyay
Cc: chefsidd , hindu_mahasabha-owner@yahoogroups.com, sanghshakha@yahoogroups.com, devika , delip sarkar , dattatray bamane , shyamala , raj , legalflcons , paresh mistry , Mahesh Prabhu , neelubhardwaj@hotmail.com, nehal_kothari70
Professor Marvin Miller of New York took samples from the riverside doorway of the Taj. Carbon dating tests revealed that the door was 300 years older than Shah Jahan.

European traveller Johan Albert Mandelslo, who visited Agra in 1638 (only seven years after Mumtaz's death), describes the life of the city in his memoirs, but makes no reference to the Taj Mahal being built.

The writings of Peter Mundy, an English visitor to Agra within a year of Mumtaz's death, also suggest that the Taj was a noteworthy building long well before Shah Jahan's time.

Oak also points out a number of design and architectural inconsistencies that support the belief that the Taj Mahal is a typical Hindu temple rather than a mausoleum.

Many rooms in the Taj Mahal have remained sealed since Shah Jahan's time, and are still inaccessible to the public. Oak asserts they contain a headless statue of Shiva and other objects commonly used for worship rituals in Hindu temples.

Fearing political backlash, Indira Gandhi's government tried to have Oak's book withdrawn from the bookstores, and threatened the Indian publisher of the first edition with dire consequences.

The only way to really validate or discredit Oak's research is to open the sealed rooms of the Taj Mahal, and allow international experts to investigate.

ll Dharmo Rakshati Rakshitaha ll
ll Sanghe Shakti Kaliyuge ll


When all other means have failed,it is righteous to draw the sword."







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From: anirban bandyopadhyay
To: ashish mishra
Cc: Bhalchandra Thattey ; VIKRAM MAHAJAN ; Shrikant Thattey ; rvchitnis@hotmail.com; Hemant ; Hemant Habbu ; A. K. ; A. Nabhan ; aditya a ; agrasen ; Ajeya Mehta ; Alochan Purohit ; Aman kumar Pandey ; amit_tripura2002 ; arish sahani ; Arpit Mishra ; Arun Lakshman ; Avinash Raykar ; purn anand ; RAJ PUSHP AWASTHI <060raj@gmail.com>; Sudhir-Architect ; suneel abbet ; Babu Menon ; Bhalchandra Thattey ; Bharath Subramanyam ; bhuvneshwar tiwari ; bob mahta ; DEV ; dr jayant ; Himanshu Bhatia ; mukesh bhatia ; narendra barde ; raj bhatia ; Vinayak Bhatia ; canindya ; Chandrakanth.V ; Chetan Joshi ; kamal chettiar ; Mahesh Camath ; vageesh chhabra ; veeraiah chowdary
Sent: Thu, 12 November, 2009 7:16:40 AM
Subject: Re: Fw: {RSS} Fwd: Tajmahal ya Tejo-Mahalaya



Dear Friends,

Please follow the link and make certain changes (limited) in wikipedia so that the evidence is established logically.

http://en.wikipedia.org/wiki/Purushottam_Nagesh_Oak#The_Kaaba

Please somebody include some pictures there.

Best Regards

Anirban


2009/11/12 ashish mishra

I think This information should be spreaded among the mass it should not be limited to WEB
We have to take this initiative

"Vande Matram"

Thanks
Ashish Mishra






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From: Bhalchandra Thattey
To: VIKRAM MAHAJAN ; Shrikant Thattey ; rvchitnis@hotmail.com; Hemant ; Hemant Habbu
Cc: A. K. ; A. Nabhan ; aditya a ; agrasen ; Ajeya Mehta ; Alochan Purohit ; Aman kumar Pandey ; amit_tripura2002 ; anirban bandyopadhyay ; arish sahani ; Arpit Mishra ; Arun Lakshman ; ashish mishra ; Avinash Raykar ; purn anand ; RAJ PUSHP AWASTHI <060raj@gmail.com>; Sudhir-Architect ; suneel abbet ; Babu Menon ; Bhalchandra Thattey ; Bharath Subramanyam ; bhuvneshwar tiwari ; bob mahta ; DEV ; dr jayant ; Himanshu Bhatia ; mukesh bhatia ; narendra barde ; raj bhatia ; Vinayak Bhatia ; canindya ; Chandrakanth.V ; Chetan Joshi ; kamal chettiar ; Mahesh Camath ; vageesh chhabra ; veeraiah chowdary
Sent: Thu, November 12, 2009 10:36:32 AM
Subject: Re: Fw: {RSS} Fwd: Tajmahal ya Tejo-Mahalaya


Thank you.
Very convincing photographs.
What is being hidden by the Government's Archaeological Department?
It is suggested that an activist should use the RTI to expose the truth.


2009/11/10 VIKRAM MAHAJAN





----- Forwarded Message ----
From: Sandeep Pandey
To: rssowner@googlegroups.com
Sent: Tue, November 10, 2009 1:11:51 AM
Subject: {RSS} Fwd: Tajmahal ya Tejo-Mahalaya




---------- Forwarded message ----------
From: madhav sharma
Date: 2009/11/9
Subject: Fwd: Tajmahal ya Tejo-Mahalaya
To: "҉ JAIN PrAtiK ♥.. Dungrpur ..♥" , 'राम सेतु की रक्षा करे! जागो हिन्दू जागो , ♥♥ everything ♥♥♥ gonna ♥♥ be ♥♥alright!! , Aditi tailor , Amar Yadav , Amit Dhanawat , antima gupta , budhiprakash , "BYE BYE BYE... LEAVIN DS TONYT..." , diwakarindoria@gmail.com, hemlata agrawal , ilu_amit_tiwari@yahoo.co.in, Kantmani Jangid , manish arora , Manoj Singh , monika gupta , naimee chand , naveen chaudhary , pradeepkorriya , Rajendra Sharma , Rajkaran Singh , ravi , Ravi Singh Charan , "Samir S." , sanjeev naroliya , Satya Prakash , Shanu , Sudhir Sharma , Umashankar Adha , "Virendra Rathore ..." , vishwa bandhu sharma , aakashkapoor4u@gmail.com, Aasish solanki , "AKS ka Atyachaar>>WTF..!!" , Balakrishnan V , Bhanu Sharma , bobbysharma2009@gmail.com, "Er.LAXMI NARAYAN BALAI [HARNER]" , gari.parashar@gmail.com, karthik Reddy , kavita , Mahaveer Saini 09001970663 , Mangesh Joshi , Mayank Bhardwaj , mayank.mishra@emkayshare.com, mohan chitale madhukar , "NATION FIRST, SELF LAST" , "Navnit Kumar ..." , neerajpandit.raj@gmail.com, Nivedita , pbsaneesh@ymail.com, prabhat parashar , Ram Shankar Uraon , rohini hrn , Sandeep Pandey , "Satyajit singh( bihar foundation)" , Shailendra , shweta Sharma , swadesh bandhu , Virtual Shakha , vishwajeet singh



बी.बी.सी. कहता है...........
ताजमहल...........
एक छुपा हुआ सत्य...........
कभी मत कहो कि.........
यह एक मकबरा है..........

ताजमहल का आकाशीय दृश्य......




आतंरिक पानी का कुंवा............

ताजमहल और गुम्बद के सामने का दृश्य
गुम्बद और शिखर के पास का दृश्य.....

शिखर के ठीक पास का दृश्य.........
आँगन में शिखर के छायाचित्र कि बनावट.....

प्रवेश द्वार पर बने लाल कमल........
ताज के पिछले हिस्से का दृश्य और बाइस कमरों का समूह........
पीछे की खिड़कियाँ और बंद दरवाजों का दृश्य........
विशेषतः वैदिक शैली मे निर्मित गलियारा.....
मकबरे के पास संगीतालय.........एक विरोधाभास.........

ऊपरी तल पर स्थित एक बंद कमरा.........


निचले तल पर स्थित संगमरमरी कमरों का समूह.........

दीवारों पर बने हुए फूल......जिनमे छुपा हुआ है ओम् ( ॐ ) ....

निचले तल पर जाने के लिए सीढियां........

कमरों के मध्य 300फीट लंबा गलियारा..
निचले तल के२२गुप्त कमरों मे सेएककमरा...
२२ गुप्त कमरों में से एक कमरे का आतंरिक दृश्य.......


अन्य बंद कमरों में से एक आतंरिक दृश्य..
एक बंद कमरे की वैदिक शैली में
निर्मित छत......

ईंटों से बंद किया गया विशाल रोशनदान .....


दरवाजों में लगी गुप्त दीवार,जिससे अन्य कमरों का सम्पर्क था.....

बहुत से साक्ष्यों को छुपाने के लिए,गुप्त ईंटों से बंद किया गया दरवाजा......


बुरहानपुर मध्य प्रदेश मे स्थित महल जहाँ मुमताज-उल-ज़मानी कि मृत्यु हुई थी........


बादशाह नामा के अनुसार,, इस स्थान पर मुमताज को दफनाया गया.........



अब कृपया इसे पढ़ें .........

प्रो.पी. एन. ओक. को छोड़ कर किसी ने कभी भी इस कथन को चुनौती नही दी कि........

"ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था"

प्रो.ओक. अपनी पुस्तक "TAJ MAHAL - THE TRUE STORY" द्वारा इस
बात में विश्वास रखते हैं कि,--

सारा विश्व इस धोखे में है कि खूबसूरत इमारत ताजमहल को मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने बनवाया था.....


ओक कहते हैं कि......

ताजमहल प्रारम्भ से ही बेगम मुमताज का मकबरा न होकर,एक हिंदू प्राचीन शिव मन्दिर है जिसे तब तेजो महालय कहा जाता था.


अपने अनुसंधान के दौरान ओक ने खोजा कि इस शिव मन्दिर को शाहजहाँ ने जयपुर के महाराज जयसिंह से अवैध तरीके से छीन लिया था और इस पर अपना कब्ज़ा कर लिया था,,

=>शाहजहाँ के दरबारी लेखक "मुल्ला अब्दुल हमीद लाहौरी "ने अपने "बादशाहनामा" में मुग़ल शासक बादशाह का सम्पूर्ण वृतांत 1000 से ज़्यादा पृष्ठों मे लिखा है,,जिसके खंड एक के पृष्ठ 402 और 403 पर इस बात का उल्लेख है कि, शाहजहाँ की बेगम मुमताज-उल-ज़मानी जिसे मृत्यु के बाद, बुरहानपुर मध्य प्रदेश में अस्थाई तौर पर दफना दिया गया था और इसके ०६ माह बाद,तारीख़ 15 ज़मदी-उल- अउवल दिन शुक्रवार,को अकबराबाद आगरा लाया गया फ़िर उसे महाराजा जयसिंह से लिए गए,आगरा में स्थित एक असाधारण रूप से सुंदर और शानदार भवन (इमारते आलीशान) मे पुनः दफनाया गया,लाहौरी के अनुसार राजा जयसिंह अपने पुरखों कि इस आली मंजिल से बेहद प्यार करते थे ,पर बादशाह के दबाव मे वह इसे देने के लिए तैयार हो गए थे.

इस बात कि पुष्टि के लिए यहाँ ये बताना अत्यन्त आवश्यक है कि जयपुर के पूर्व महाराज के गुप्त संग्रह में वे दोनो आदेश अभी तक रक्खे हुए हैं जो शाहजहाँ द्वारा ताज भवन समर्पित करने के लिए राजा
जयसिंह को दिए गए थे.......

=>यह सभी जानते हैं कि मुस्लिम शासकों के समय प्रायः मृत दरबारियों और राजघरानों के लोगों को दफनाने के लिए, छीनकर कब्जे में लिए गए मंदिरों और भवनों का प्रयोग किया जाता था ,
उदाहरनार्थ हुमायूँ, अकबर, एतमाउददौला और सफदर जंग ऐसे ही भवनों मे दफनाये गए हैं ....

=>प्रो. ओक कि खोज ताजमहल के नाम से प्रारम्भ होती है---------

="महल" शब्द, अफगानिस्तान से लेकर अल्जीरिया तक किसी भी मुस्लिम देश में
भवनों के लिए प्रयोग नही किया जाता...
यहाँ यह व्याख्या करना कि महल शब्द मुमताज महल से लिया गया है......वह कम से कम दो प्रकार से तर्कहीन है---------

पहला -----शाहजहाँ कि पत्नी का नाम मुमताज महल कभी नही था,,,बल्कि उसका नाम मुमताज-उल-ज़मानी था ...

और दूसरा-----किसी भवन का नामकरण किसी महिला के नाम के आधार पर रखने के लिए केवल अन्तिम आधे भाग (ताज)का ही प्रयोग किया जाए और प्रथम अर्ध भाग (मुम) को छोड़ दिया जाए,,,यह समझ से परे है...

प्रो.ओक दावा करते हैं कि,ताजमहल नाम तेजो महालय (भगवान शिव का महल) का बिगड़ा हुआ संस्करण है, साथ ही साथ ओक कहते हैं कि----
मुमताज और शाहजहाँ कि प्रेम कहानी,चापलूस इतिहासकारों की भयंकर भूल और लापरवाह पुरातत्वविदों की सफ़ाई से स्वयं गढ़ी गई कोरी अफवाह मात्र है क्योंकि शाहजहाँ के समय का कम से कम एक शासकीय अभिलेख इस प्रेम कहानी की पुष्टि नही करता है.....



इसके अतिरिक्त बहुत से प्रमाण ओक के कथन का प्रत्यक्षतः समर्थन कर रहे हैं.......
तेजो महालय (ताजमहल) मुग़ल बादशाह के युग से पहले बना था और यह भगवान् शिव को समर्पित था तथा आगरा के राजपूतों द्वारा पूजा जाता था-----

==>न्यूयार्क के पुरातत्वविद प्रो. मर्विन मिलर ने ताज के यमुना की तरफ़ के दरवाजे की लकड़ी की कार्बन डेटिंग के आधार पर 1985 में यह सिद्ध किया कि यह दरवाजा सन् 1359 के आसपास अर्थात् शाहजहाँ के काल से लगभग 300 वर्ष पुराना है...


==>मुमताज कि मृत्यु जिस वर्ष (1631) में हुई थी उसी वर्ष के अंग्रेज भ्रमण कर्ता पीटर मुंडी का लेख भी इसका समर्थन करता है कि ताजमहल मुग़ल बादशाह के पहले का एक अति महत्वपूर्ण भवन था......


==>यूरोपियन यात्री जॉन अल्बर्ट मैनडेल्स्लो ने सन् 1638 (मुमताज कि मृत्यु के 07 साल बाद) में आगरा भ्रमण किया और इस शहर के सम्पूर्ण जीवन वृत्तांत का वर्णन किया,,परन्तु उसने ताज के बनने का कोई भी सन्दर्भ नही प्रस्तुत किया,जबकि भ्रांतियों मे यह कहा जाता है कि ताज का निर्माण कार्य 1631 से 1651 तक जोर शोर से चल रहा था......


==>फ्रांसीसी यात्री फविक्स बर्निअर एम.डी. जो औरंगजेब द्वारा गद्दीनशीन होने के समय भारत आया था और लगभग दस साल यहाँ रहा,के लिखित विवरण से पता चलता है कि,औरंगजेब के शासन के समय यह झूठ फैलाया जाना शुरू किया गया कि ताजमहल शाहजहाँ ने बनवाया था.......

प्रो. ओक. बहुत सी आकृतियों और शिल्प सम्बन्धी असंगताओं को इंगित करते हैं जो इस विश्वास का समर्थन करते हैं कि,ताजमहल विशाल मकबरा न होकर विशेषतः हिंदू शिव मन्दिर है.......

आज भी ताजमहल के बहुत से कमरे शाहजहाँ के काल से बंद पड़े हैं,जो आम जनता की पहुँच से परे हैं

प्रो.. ओक., जोर देकर कहते हैं कि हिंदू मंदिरों में ही पूजा एवं धार्मिक संस्कारों के लिए भगवान् शिव की मूर्ति,त्रिशूल,कलश और ॐ आदि वस्तुएं प्रयोग की जाती हैं.......

==>ताज महल के सम्बन्ध में यह आम किवदंत्ती प्रचलित है कि ताजमहल के अन्दर मुमताज की कब्र पर सदैव बूँद बूँद कर पानी टपकता रहता है,, यदि यह सत्य है तो पूरे विश्व मे किसी किभी कब्र पर बूँद बूँद कर पानी नही टपकाया जाता,जबकि प्रत्येक हिंदू शिव मन्दिर में ही शिवलिंग पर बूँद बूँद कर पानी टपकाने की व्यवस्था की जाती है,फ़िर ताजमहल (मकबरे) में बूँद बूँद कर पानी टपकाने का क्या मतलब.....????



राजनीतिक भर्त्सना के डर से इंदिरा सरकार ने ओक की सभी पुस्तकें स्टोर्स से वापस ले लीं थीं और इन पुस्तकों के प्रथम संस्करण को छापने वाले संपादकों को भयंकर परिणाम भुगत लेने की धमकियां भी दी गईं थीं....


प्रो. पी. एन. ओक के अनुसंधान को ग़लत या सिद्ध करने का केवल एक ही रास्ता है कि वर्तमान केन्द्र सरकार बंद कमरों को संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षण में खुलवाए, और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों को छानबीन करने दे .....


ज़रा सोचिये....!!!!!!


कि यदि ओक का अनुसंधान पूर्णतयः सत्य है तो किसी देशी राजा के बनवाए गए संगमरमरी आकर्षण वाले खूबसूरत,शानदार एवं विश्व के महान आश्चर्यों में से एक भवन, "तेजो महालय" को बनवाने का श्रेय बाहर से आए मुग़ल बादशाह शाहजहाँ को क्यों......?????
तथा......

इससे जुड़ी तमाम यादों का सम्बन्ध मुमताज-उल-ज़मानी से क्यों........???????


आंसू टपक रहे हैं, हवेली के बाम से,,,,,,,,
रूहें लिपट के रोटी हैं हर खासों आम से.....
अपनों ने बुना था हमें,कुदरत के काम से,,,,

फ़िर भी यहाँ जिंदा हैं हम गैरों के नाम से......








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Thanks & Regards.......

Madhav Sharma
Jaipur
+91 9351157671








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Shubham Bhavatu
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